हल्द्वानी: यूओयू में दो दिवसीय राष्ट्रीय मंथन सम्पन्न, सतत विकास को लेकर नई सोच उभरी

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हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। समाज, स्वच्छता और सतत विकास जैसे ज्वलंत मुद्दों पर गंभीर मंथन और सार्थक संवाद का केंद्र बना उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय का परिसर, जहां दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ने न केवल अकादमिक जगत को नई दिशा दी बल्कि सामाजिक चेतना को भी मजबूती प्रदान की।

देशभर से आए विद्वानों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी के बीच आयोजित इस संगोष्ठी का समापन सत्र 18 मार्च 2026 को अत्यंत गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ, जिसमें विचारों, अनुभवों और सुझावों का समृद्ध आदान-प्रदान देखने को मिला।

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उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी, समाज विज्ञान विद्याशाखा के समाजशास्त्र विभाग द्वारा “समाज, स्वच्छता एवं सतत् विकास लक्ष्यः एक समाजशास्त्रीय चिंतन” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन सत्र बुधवार को विश्वविद्यालय परिसर स्थित सीडीएस जनरल बिपिन रावत बहुउद्देशीय सभागार में सम्पन्न हुआ।

दो दिवसीय संगोष्ठी में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से पधारे विद्वानों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की सक्रिय एवं प्रभावशाली सहभागिता रही। समापन सत्र का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

संगोष्ठी का संयोजन प्रो. रेनू प्रकाश (निदेशक, समाज विज्ञान विद्याशाखा) ने किया गया। अतिथियों के स्वागत उद्बोधन में सभी अतिथियों एवं आयोजकों का धन्यवाद ज्ञापन किया।

समापन सत्र के अवसर पर प्रो. राकेश रयाल, निदेशक पत्रकारिता विद्याशाखा ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस संगोष्ठी के माध्यम से विद्वानों एवं शोधार्थियों के मध्य सार्थक शैक्षणिक संवाद स्थापित हुआ तथा स्वच्छता एवं सतत् विकास के लक्ष्यों को समझने और आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण विचार सामने आए।

समापन सत्र की विशिष्ट वक्ता प्रो. ज्योति जोशी (विभागाध्यक्ष एवं संयोजक, समाजशास्त्र, डी.एस.बी. परिसर, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल) ने संगोष्ठी के विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि “सतत् विकास की अवधारणा तभी सार्थक होगी जब समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता सुनिश्चित हो। शिक्षा एवं जागरूकता इसके प्रमुख साधन हैं।” स्वच्छता आधारभूत मानव चेतना से जुड़ा हुआ पहलू है।

मुख्य वक्ता प्रो. इला साह (पूर्व संयोजक, समाजशास्त्र, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा) ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि “सतत् विकास लक्ष्य केवल वैश्विक एजेंडा नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर सामाजिक सहभागिता के माध्यम से साकार होने वाली प्रक्रिया है। स्वच्छता को केवल भौतिक नहीं, बल्कि मानसिक एवं सांस्कृतिक स्तर पर भी अपनाना आवश्यक है।” वैचारिक स्वच्छता ही समाज की प्रेरणा स्रोत होती है।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रो. अतवीर सिंह (निदेशक, इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस स्टडीज, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ) ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्वच्छता एवं सतत् विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि सामाजिक संरचना एवं व्यवहार में परिवर्तन के बिना इन लक्ष्यों की प्राप्ति संभव नहीं है।

उन्होंने युवाओं को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। ज्ञानार्जन एवं सकारात्मक सोच समाज के सतत् विकास का मुख्य साधन है। संसाधनों का इष्टतम प्रयोग सतत् विकास का प्रथम सोपान है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि समाज, स्वच्छता एवं सतत् विकास लक्ष्य केवल नीतिगत विषय नहीं हैं, बल्कि ये हमारे दैनिक जीवन, सामाजिक व्यवहार एवं नैतिक दायित्वों से गहराई से जुड़े हुए हैं।

ऐसे अकादमिक मंच समाज में जागरूकता एवं उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने संगोष्ठी के सफल आयोजन हेतु विभाग को बधाई दी तथा भविष्य में इस प्रकार के विमर्शों को निरंतर जारी रखने पर बल दिया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. नागेंद्र गंगोला ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. खेमराज भट्ट (कुलसचिव) द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि यह संगोष्ठी अवश्य ही समाज को एक नई दिशा देने का कार्य करेंगी।

इस संगोष्ठी में कुल सात सत्रों का आयोजन हुआ जिसमें प्रथम दिवस पर चार सत्रों में 40 से अधिक शोध पत्रों का वाचन हुआ। द्वितीय दिवस पर तीन तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से आए विद्वानों एवं शोधार्थियों द्वारा 30 से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किए गए।

द्वितीय दिवस के अध्यक्ष प्रो. डिगर सिंह फर्सवाण एवं प्रो. राकेश रयाल तथा मुख्य वक्ता प्रो. आशुतोष भट्ट एवं डॉ. अमिता प्रकाश रहे। इन तकनीकी सत्रों का प्रतिवेदन डॉ. पुष्पा बुढलाकोटी, डॉ. लता जोशी एवं डॉ. योगेश मनाली ने किया।

संगोष्ठी का समग्र प्रतिवेदन डॉ. भावना डोभाल द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें संगोष्ठी की प्रमुख उपलब्धियों एवं निष्कर्षों को रेखांकित किया गया।

यह दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी न केवल अकादमिक दृष्टि से अत्यंत सफल सिद्ध हुई, बल्कि इसने समाज, स्वच्छता एवं सतत् विकास लक्ष्यों के प्रति जागरूकता, संवाद एवं सहभागिता को एक नई दिशा प्रदान की। कार्यक्रम का समापन ज्ञान, चिंतन एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना के साथ अत्यंत प्रेरणादायी रूप में हुआ।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अनेक निदेशकगण, प्राध्यापक, प्रशासनिक अधिकारी एवं गणमान्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में डॉ. गोपाल सिंह गौनिया, डॉ. नीरज जोशी, श्रीमती शैलजा, डॉ. किशोर कुमार, डॉ. सीता, प्रो. मंजरी अग्रवाल, डॉ. घनश्याम जोशी, डॉ. शशांक शुक्ल, प्रो. सोमेश कुमार, प्रो. आशुतोष भट्ट, डॉ. नीरजा सिंह, श्री हिमांशु पुनेठा, डॉ. लता जोशी, डॉ. द्विजेश उपाध्याय, डॉ. रंजू जोशी पांडे, डॉ. आशीष टम्टा, डॉ. शालिनी चौधरी, डॉ. नमीता वर्मा, डॉ. जगमोहन परगांई, विकास जोशी, ऋतंभरा, राजेश आर्या, मोहित रावत, रेनू भट्ट, ज्योति, नवीन जोशी सहित अनेक छात्र-छात्राएं एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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