
देहरादून, प्रेस 15 न्यूज। उत्तराखंड की सियासत में एक बार फिर भूचाल आ गया है। मामला सिर्फ पति-पत्नी के बीच छिड़े संग्राम या वीडियो वॉर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें 200 करोड़ की अकूत संपत्ति, भ्रष्टाचार और दलबदल के पुराने राज भी बाहर आने लगे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस हाई-प्रोफाइल विवाद में कूदते हुए सीधे सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि जब खुद एक मंत्री के पति ने सीएम से मिलकर भ्रष्टाचार की शिकायत करने की बात कही है, तो फिर खामोशी क्यों? हरीश रावत के इन तीखे और बेबाक सवालों ने राज्य की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपनी फेसबुक वाल में जो साझा किया उसे ज्यों का त्यों पढ़िए 👇
श्रीमती रेखा आर्या जी और उनके पति गिरधारी लाल जी के जिस प्रकार से वीडियो में वायरल हो रहे हैं और बहुत सारी गंभीर बातें कही जा रही हैं, उससे उत्तराखंड को स्वाभाविक रूप में चिंता होनी चाहिए। श्रीमती रेखा आर्या ने अपने पति पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए उनसे अपनी जान को खतरा बताया है। ऐसी स्थिति में रेखा आर्या जी की सुरक्षा के लिए आवश्यक है कि गिरधारी लाल साहू को पुलिस एफआईआर के अनुरूप समुचित धाराओं में गिरफ्तार करे।
प्रश्न यहीं पर समाप्त नहीं होता।
श्री गिरधारी लाल साहू ने भी अपने सार्वजनिक किए गए वीडियोज के माध्यम से अपनी पत्नी रेखा आर्या, मंत्री महिला सशक्तिकरण आदि-आदि पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने जो सबसे गंभीर बात कही है कि ‘मैं मुख्यमंत्री जी से मिला था। मैंने उनको रेखा आर्या जी द्वारा विभाग में किए जा रहे भ्रष्टाचार की जानकारी दी थी।’ यदि ऐसी जानकारी दी गई, तो मुख्यमंत्री जी को यह बताना चाहिए कि उन्होंने उस पर कार्रवाई क्या की? और यदि नहीं दी गई, तो उसका जो श्री साहू कह रहे हैं, उसका खंडन आना चाहिए। क्योंकि भ्रष्टाचार के शिकायतकर्ता और कोई नहीं हैं, श्रीमती रेखा आर्या के पति हैं और वो पति हैं जिन पर उत्तराखंड का आरोप है कि उन्होंने उत्तराखंड की धन-दौलत को लूटकर बरेली में अपना साम्राज्य खड़ा किया है।
दूसरी गंभीर बात श्री साहू ने यह कही है कि श्रीमती रेखा आर्या के पास 200 करोड़ से अधिक की संपत्ति है। श्रीमती रेखा आर्या को 2014 में जब कुछ लोग मेरे पास सोमेश्वर से कांग्रेस उम्मीदवार बनाए जाने के लिए लेकर आए, मैंने उसे एक अति सामान्य परिवार की, मगर महत्वाकांक्षी और यत्नशील लड़की समझकर पार्टी नेतृत्व से रेखा आर्या जी को उम्मीदवार बनाने की संस्तुति की और वो उम्मीदवार बनीं और विधायक भी बनी। 2016 में वो दलबदल कर भाजपा में सम्मिलित हुईं। निश्चित तौर पर उसके लिए उनको एक बड़ी धनराशि दी गई होगी।
वो धनराशि पति के पास रही या रेखा आर्या जी के पास रही, ये तो वही दोनों बेहतर बता सकते हैं। 2017 से श्रीमती रेखा आर्या मंत्री हैं। उनके विभागों पर मनमानी और भ्रष्टाचार के सवाल उठते रहे हैं। अब श्री साहू द्वारा लगाए गए ₹200 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति का आरोप अत्यधिक गंभीर है। क्योंकि एक सामान्य पृष्ठभूमि से ₹200 करोड़ से अधिक की संपत्ति अर्जित करना एक आश्चर्यजनक समाचार है। क्योंकि यह दौलत निश्चित तौर पर भ्रष्टाचार के माध्यम से ही अर्जित की गई होगी।
सामान्य तौर पर जो लोग अपनी जीवन, राजनीतिक जीवन यात्रा प्रारंभ करते हैं, उन लोगों के पास उनकी राजनीतिक यात्रा के समतुल्य ही संपत्तियां होनी चाहिए।
मैं 1968-69 में जब कांग्रेस का सदस्य बना, तब से लेकर मैं निरंतर महत्वपूर्ण पदों पर रहा ब्लॉक प्रमुख रहा, युवक कांग्रेस का अध्यक्ष रहा, युवक कांग्रेस का प्रदेश महामंत्री रहा, फिर सांसद बन गया, एक मैनेजमेंट कमेटी का अध्यक्ष रहा और सांसद बनने के बाद निरंतर बड़े-बड़े पदों पर उस कालखंड में रहा जब कांग्रेस की तूती बोलती थी।
यदि मेरे पास तो छोड़िए, मेरे परिवार के पास भी 15-20 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है, तो फिर हमको यह सिद्ध करना पड़ेगा, यह संपत्ति कहां से अर्जित हुई।
मगर यह 200 करोड़ रुपये की संपत्ति तो आश्चर्यजनक संख्या है। इस संपत्ति के स्रोतों की ईडी या सीबीआई को जांच करनी चाहिए। यदि ऐसी जांच नहीं होती है, तो यह समझा जाएगा कि यह संदेह और पुष्ट हो जाएगा कि सीबीआई, ईडी और इनकम टैक्स केवल विपक्ष के लोगों के लिए है। ये सत्ता के लोग कितनी ही लूट कर लें, उनके ऊपर कहीं से भी कोई अंकुश या रोक नहीं है।











