
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी के संस्कार देना भी शिक्षा का अहम उद्देश्य है। इसी सोच के साथ लिटिल फ्लावर स्कूल का प्रबंधन विद्यार्थियों को प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर स्वच्छता को जीवनशैली का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
विद्यालय के बच्चे न केवल प्लास्टिक कचरे से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को समझ रहे हैं, बल्कि उसे एकत्रित कर स्वच्छता अभियान में सक्रिय योगदान भी दे रहे हैं। बचपन में विकसित हो रही यही जागरूकता भविष्य में जिम्मेदार नागरिक और स्वच्छ पर्यावरण की मजबूत नींव बन सकती है।
नगर निगम सभागार में आयोजित स्वच्छता ही सेवा 2026 कार्यक्रम में लिटिल फ्लावर स्कूल के तीन विद्यार्थियों को प्लास्टिक वेस्ट कलेक्शन में निरंतर योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
नगर आयुक्त परितोष वर्मा ने विद्यार्थियों के प्रयासों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी जागरूकता की सराहना की। तीनों विद्यार्थियों ने अपनी शिक्षिका राधा भट्ट के मार्गदर्शन में पुरस्कार ग्रहण किया।
तीन नौनिहालों ने बढ़ाया विद्यालय और परिवार का मान
सम्मानित विद्यार्थियों में कक्षा चार की मानस्वी बगडवाल, कक्षा चार के कुशाल महराऔर कक्षा एक के खुशविक जीना शामिल हैं। मानस्वी के पिता चंदन सिंह बगडवाल और माता सोनू बगडवाल हैं। कुशाल के पिता सुरेश महरा और माता खिला महरा हैं। वहीं, खुशविक के पिता अंशुल जीना और माता पूजा जीना हैं।
कम उम्र में ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति इन बच्चों की जागरूकता उनके पारिवारिक संस्कारों और विद्यालय में मिल रही शिक्षा का सकारात्मक उदाहरण है। बच्चों में स्वच्छता, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का भाव विकसित करने में माता-पिता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।

घर से मिलने वाले अच्छे संस्कार जब विद्यालय में शिक्षकों के मार्गदर्शन से जुड़ते हैं, तो बच्चों में सकारात्मक आदतें विकसित होती हैं। इन तीनों विद्यार्थियों की उपलब्धि उनके प्रयासों के साथ-साथ अभिभावकों के प्रोत्साहन और शिक्षिका राधा भट्ट के मार्गदर्शन के महत्व को भी रेखांकित करती है।
बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाना विद्यालय का उद्देश्य : शान्ति जीना
विद्यालय की प्रधानाचार्य शान्ति जीना ने कहा कि बच्चों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाना और उनमें स्वच्छता की जिम्मेदारी का भाव विकसित करना विद्यालय की प्राथमिकताओं में शामिल है। प्लास्टिक कचरा पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती है। बच्चों को इसके दुष्प्रभावों की जानकारी देने के साथ व्यावहारिक गतिविधियों से जोड़ना जरूरी है, ताकि वे बचपन से ही प्रकृति की रक्षा का महत्व समझ सकें।
उन्होंने कहा कि बच्चों में विकसित होने वाली स्वच्छता की आदतें उनके परिवार और समाज को भी प्रभावित करती हैं। विद्यालय का प्रयास है कि विद्यार्थी केवल स्वयं जागरूक न बनें, बल्कि दूसरों को भी प्लास्टिक का उपयोग कम करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करें।

विद्यार्थियों की इस उपलब्धि पर विद्यालय परिवार ने हर्ष व्यक्त किया। यह पहल संदेश देती है कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकारी अभियानों तक सीमित नहीं है। परिवार और विद्यालय मिलकर बच्चों में जिम्मेदारी का भाव विकसित करें, तो छोटी उम्र में किए गए प्रयास भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।











