
चंपावत, प्रेस 15 न्यूज। उत्तराखंड में शासन को राजधानी से बाहर दूरस्थ और सीमांत क्षेत्रों तक ले जाने की पहल के तहत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में रविवार को बनबसा स्थित एनएचपीसी परिसर में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक हुई। चंपावत जिले में पहली बार आयोजित हुई कैबिनेट बैठक में करीब 25 प्रस्तावों पर चर्चा के बाद कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई।
बैठक का सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि कैबिनेट की बैठकें अब केवल देहरादून तक सीमित नहीं रहेंगी। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आगे प्रदेश के विभिन्न जनपदों में भी मंत्रिमंडल की बैठकें आयोजित की जाएंगी, ताकि स्थानीय समस्याओं, जन अपेक्षाओं और क्षेत्रीय विकास की जरूरतों को शासन के स्तर पर सीधे समझकर उन पर निर्णय लिया जा सके।
भारत-नेपाल सीमा से सटे बनबसा में हुई बैठक को सीमांत क्षेत्रों को शासन की मुख्यधारा से जोड़ने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्र केवल भौगोलिक सीमाएं नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा, संस्कृति और विकास की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। सरकार का प्रयास है कि इन क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं, रोजगार, पर्यटन और कनेक्टिविटी को मजबूत किया जाए।
युवाओं और रोजगार से जुड़े फैसले
कैबिनेट बैठक में युवाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सरकार की ओर से कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने से जुड़े प्रस्तावों पर मंजूरी दी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार युवाओं के लिए 200 करोड़ रुपये की स्किलिंग योजना को भी मंजूरी मिली है। इसका उद्देश्य युवाओं को रोजगार की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण और कौशल उपलब्ध कराना है।
वहीं, उत्तराखंड लोक सेवा आयोग से संबंधित नियमों में संशोधन को भी मंजूरी दी गई। इसके तहत जिला युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी के पद को लोक सेवा आयोग के परिशिष्ट से बाहर किया जाएगा, क्योंकि सेवा नियमावली के अनुसार यह राजपत्रित समूह ‘ख’ का पद है।
डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े अहम फैसले में सीनियर और जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी का निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद इसकी जानकारी दी।
कुक्कुट पालकों को सब्सिडी, अब खाते में पहुंचेगी राशि
कुक्कुट पालकों के लिए भी कैबिनेट ने राहत का फैसला लिया। कुक्कुट आहार सब्सिडी योजना के तहत लाभार्थियों को सब्सिडी का भुगतान अब वर्तमान सीबीडीसी/ई-रूपी आधारित व्यवस्था के स्थान पर आधार सीडेड या लिंक्ड बैंक खाते के माध्यम से डीबीटी से किया जाएगा।
सरकार का दावा है कि इससे सब्सिडी भुगतान की प्रक्रिया को अधिक सीधा और पारदर्शी बनाया जा सकेगा।
पशुपालन, डेयरी और मत्स्य विभाग के लिए नया महानिदेशक पद
पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभागों में बेहतर समन्वय, पर्यवेक्षण और प्रशासनिक एकरूपता के लिए महानिदेशक का नया पद सृजित करने को भी मंजूरी दी गई। सरकार के अनुसार इससे केंद्र और राज्य की योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन तथा उनकी निगरानी में मदद मिलेगी।
पुराने सिंचाई कानून की जगह नया विधेयक
कैबिनेट ने उत्तरी भारत नहर एवं जल निकास अधिनियम, 1873 को निरस्त करने तथा उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप उत्तराखंड सिंचाई एवं जल निकासी विधेयक, 2026 को विधानसभा के पटल पर रखने की मंजूरी दी।
निवेश से होने वाली आय में 92 प्रतिशत हिस्सा संबंधित अभिकरणों को
नियोजन विभाग के प्रस्ताव पर उत्तराखंड निवेश और आधारिक संरचना (विकास और विनियमन) अधिनियम की धारा 49 के तहत अनुसूची-3 में संशोधन को मंजूरी दी गई। इसके तहत संबंधित अभिकरणों की परिसंपत्तियों के विनिवेश या मुद्रीकरण से प्राप्त आय का 92 प्रतिशत हिस्सा संबंधित अभिकरणों को दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
पुलिस ढांचे में भी बदलाव
कैबिनेट ने तत्कालीन अधिष्ठान, उत्तराखंड के ढांचे के पुनर्गठन को मंजूरी दी। इसके तहत 8 आरक्षी न.पु., एक आरक्षी डाक रनर और दो आरक्षी चालक समेत कुल 11 पद समर्पित किए जाएंगे।
फर्रा/छन्तोली से हुआ लोक संस्कृति का सम्मान
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मंत्रिमंडल के सदस्यों को चम्पावत की समृद्ध लोक परंपरा से जुड़ी ‘फर्रा/छन्तोली’ भेंट की गई। यह देवीधुरा की प्रसिद्ध बग्वाल परंपरा से जुड़ी पारंपरिक ढाल है, जिसे मुख्यतः बांस अथवा रिंगाल की खपच्चियों से तैयार किया जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सीमांत क्षेत्रों की अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान है और सरकार इन क्षेत्रों के विकास के साथ उनकी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को भी महत्व दे रही है।
अब दूसरे जिलों में भी होगी कैबिनेट
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में कैबिनेट बैठकें आयोजित करने से स्थानीय परिस्थितियों और जन अपेक्षाओं को करीब से समझने में मदद मिलेगी। इससे क्षेत्र विशेष से जुड़े विषयों पर प्रभावी और त्वरित निर्णय लेने का रास्ता भी खुलेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि शासन और जनता के बीच की दूरी कम हो और विकास योजनाओं का लाभ प्रदेश के अंतिम छोर तक पहुंचे।











