
देहरादून/डोईवाला, प्रेस 15 न्यूज। सरकारी तनख्वाह से भी अधिकारियों का पेट नहीं भर रहा है। नए शैक्षणिक सत्र के पहले ही दिन शिक्षा विभाग में तैनात भ्रष्ट अधिकारियों की एक और परत खुल गई। जो आज तक ईमानदारी का चोला ओढ़े सिस्टम को चूना लगा रहे थे। विजिलेंस की कार्रवाई ने ऐसे ही एक अधिकारी की असलियत को बेनकाब कर दिया, जिसने रिश्वत मांगने को अपना धर्म बना लिया।
सतर्कता अधिष्ठान सैक्टर देहरादून की ट्रैप टीम ने 01 अप्रैल को मुकदमा संख्या 07/2026 (धारा 7, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 संशोधित 2018) के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए डोईवाला के प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी (SDEO) धनवीर सिंह बिष्ट को रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोच लिया। इस दौरान उनके साथ मौजूद महिला सहयोगी पुष्पांजलि को भी गिरफ्तार किया गया।
विजिलेंस के अनुसार, शिकायतकर्ता गंगा वैली जूनियर हाईस्कूल, ऋषिकेश से जुड़ा है, जहां शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत छात्रों की फीस प्रतिपूर्ति का बिल लंबित था।
आरोप है कि बिल पास कराने और भुगतान जारी करने के एवज में एक लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। शिकायत के बाद टीम ने योजनाबद्ध तरीके से नेपाली फार्म चौक क्षेत्र में जाल बिछाया और जैसे ही आरोपी रकम ले रहे थे, दोनों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों में धनवीर सिंह बिष्ट (उप शिक्षा अधिकारी एवं प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी, डोईवाला) और पुष्पांजलि (निवासी डालनवाला, देहरादून, स्वामी उत्तरांचल मॉडर्न स्कूल से संबद्ध) शामिल हैं। दोनों से पूछताछ जारी है और आगे की विवेचना प्रचलित है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी उक्त अधिकारी पर नेपाली फार्म क्षेत्र में 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लग चुका है, जिसमें एक बिचौलिये की भूमिका भी सामने आई थी। लगातार सामने आ रहे मामलों ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।









