
अल्मोड़ा, प्रेस 15 न्यूज। वन विभाग में सालों से जड़ें जमा चुका भ्रष्टाचार एक बार फिर बेनकाब हुआ है। “जंगल में मोर नाचा किसने देखा” वाली कहावत यहां सटीक बैठती है क्योंकि पर्दे के पीछे चल रहे खेल अब धीरे-धीरे सामने आने लगे हैं। यह पहला मामला नहीं है, और साफ संकेत है कि ऐसे कई चेहरे अभी भी सिस्टम के भीतर ईमानदार बनकर छिपे बैठे हैं।
इसी कड़ी में सतर्कता अधिष्ठान की टीम को बड़ी कामयाबी मिली है। हल्द्वानी सेक्टर की टीम ने जाल बिछाकर जागेश्वर वन क्षेत्राधिकारी कार्यालय में तैनात फारेस्टर नवीन नौटियाल को 25,500 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।
दरअसल, शिकायतकर्ता जय प्रकाश ने सतर्कता विभाग को सूचना दी थी कि फॉरेस्टर नौटियाल लीसा गड़ान-दुलान कार्य के पंजीकरण नवीनीकरण और लंबित बिलों के भुगतान के नाम पर 25,500 रुपये की घूस मांग रहा है। शिकायत की पुष्टि होने के बाद टीम ने सुनियोजित ट्रैप ऑपरेशन तैयार किया।
योजना के तहत जैसे ही आरोपी ने रिश्वत की रकम ली, पहले से मुस्तैद टीम ने उसे मौके पर ही धर दबोचा। गिरफ्तारी के बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामले ने उस वक्त और गंभीर रूप ले लिया जब जांच के दौरान वन विभाग के अन्य अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई। सतर्कता अधिष्ठान ने उनके खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कार्रवाई के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ एक चेहरा है या पूरी श्रृंखला का एक हिस्सा?
सतर्कता अधिष्ठान ने आम जनता से अपील की है कि यदि कोई भी सरकारी कर्मचारी रिश्वत की मांग करता है तो तुरंत इसकी शिकायत करें, ताकि ऐसे “छिपे मोरों” को भी सामने लाया जा सके।









