बड़ी खबर: नैनीताल में पानी नहीं, बीमारी की सप्लाई! 50% ग्रामीण बीमार, 20 से ज्यादा बच्चों को पीलिया… स्कूल बंद

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नैनीताल, प्रेस 15 न्यूज। पहाड़ों की खूबसूरती के बीच नैनीताल से चंद किलोमीटर दूर जिंदगी का एक बेहद डरावना सच सामने आया है। वीरभट्टी, छिंडां मल्ला, गांजा, बगरीखोड़, छिंडां तल्ला और सड़ियाताल क्षेत्र में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें ऐसा पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिसमें नाले का पानी और सीवर मिलकर आ रहा है।

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दावा है कि दूषित पानी पीने से इन गांवों में करीब 200 लोगों में से लगभग 50 प्रतिशत आबादी पेट संबंधी बीमारियों से जूझ रही है। पीलिया, डायरिया, उल्टी-दस्त, बुखार और पेचिश जैसी बीमारियों ने बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को अपनी चपेट में ले लिया है। ग्रामीणों के मुताबिक कई परिवारों में एक साथ लोग बीमार पड़ रहे हैं।

पानी की एक बूंद… और बीमारी का डर

सबसे चिंताजनक बात यह है कि समस्या केवल किसी एक परिवार या एक गांव तक सीमित नहीं बताई जा रही। वीरभट्टी, छिंडां मल्ला, गांजा, बगरीखोड़, छिंडां तल्ला और सड़ियाताल में जल संस्थान की पेयजल आपूर्ति होती है। ऐसे में सवाल सिर्फ पानी की गुणवत्ता का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की निगरानी का है जिसके भरोसे ग्रामीण रोज अपने परिवार का स्वास्थ्य सौंप रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि पानी की स्थिति इतनी खराब है कि उसे देखकर और इस्तेमाल करने के बाद बीमारी का डर सताता है। क्षेत्र में बच्चे, महिलाएं, युवा और बुजुर्ग प्रभावित बताए जा रहे हैं। मौके पर ग्रामीणों की कमजोरी और सुस्ती भी चिंता बढ़ाने वाली तस्वीर पेश करती है।

ज्योलीकोट के स्कूल में 20 से ज्यादा छात्र पीलिया की चपेट में

मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हल्द्वानी-नैनीताल मार्ग पर ज्यूलिकोट क्षेत्र में स्थित एक प्रतिष्ठित स्कूल के 20 से अधिक छात्रों को पेट दर्द समेत अन्य स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें हुईं। जांच के बाद इन छात्रों में पीलिया की पुष्टि होने की जानकारी सामने आई है।

इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने एहतियातन स्कूल में आपातकालीन अवकाश घोषित कर दिया और इसे आगामी राखी की छुट्टियों के साथ जोड़ दिया गया है। जानकारी के अनुसार स्कूल अब 1 सितंबर से खुलने की बात कही गई है।

यह सिर्फ स्कूल बंद होने की खबर नहीं है। सवाल यह है कि आखिर बच्चों को बीमार करने वाली परिस्थितियां पैदा ही क्यों हुईं?

पहले भी सामने आ चुकी है दूषित पानी की समस्या

चिंता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि इस क्षेत्र से जुड़े इलाकों में पहले भी दूषित पेयजल आपूर्ति के कारण लोग पेट संबंधी गंभीर बीमारियों का शिकार हो चुके हैं। उस समय जल संस्थान की ओर से पानी के नमूने लिए गए थे और स्वास्थ्य शिविर लगाया गया था, जिसमें सैकड़ों लोगों के बीमार होने की जानकारी सामने आई थी।

अगर पहले भी शिकायतें और बीमारी सामने आ चुकी थीं, तो फिर सवाल और बड़ा है समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं हुआ?

सवाल सिर्फ पानी का नहीं, जिम्मेदारी का है

यह मामला किसी सड़क, नाली या छोटी प्रशासनिक खामी का नहीं है। पानी सीधे इंसान के शरीर में जाता है। वही पानी अगर बीमारी का कारण बन जाए तो यह पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें शुद्ध पेयजल चाहिए, आश्वासन नहीं। उन्हें ऐसा समाधान चाहिए जिससे उनके बच्चों, बुजुर्गों और परिवारों को रोज यह डर लेकर पानी न पीना पड़े कि कहीं अगली सुबह बीमारी लेकर न आए।

पीड़ा जाहिर करते ग्रामीण।

प्रशासन और जल संस्थान के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार किया जाएगा या उससे पहले पानी की जांच, पाइपलाइन और स्रोत की पूरी व्यवस्था को गंभीरता से खंगाला जाएगा?

ग्रामीणों ने प्रशासन और जल संस्थान से दूषित पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान, पानी की गुणवत्ता की जांच और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है। क्योंकि पानी जिंदगी है और अगर वही बीमारी बांटने लगे तो सिर्फ गांव नहीं, पूरा सिस्टम कटघरे में खड़ा होता है।

(नैनीताल से वरिष्ठ पत्रकार कमल जगाती की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट ✍️)

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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