पत्ते की पकौड़ी का स्वाद पड़ा भारी, 9 लोग बीमार… नैनीताल की घटना से लें सबक

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नैनीताल, प्रेस 15 न्यूज। पहाड़ों में परंपरा और स्वाद के नाम पर जंगलों से मिलने वाली हर पत्ती या वनस्पति खाने योग्य नहीं होती। नैनीताल में ऐसी ही एक घटना ने लोगों को सावधान करने का काम किया है।

यहां स्थानीय तौर पर ‘जरक’ (फाईटालेका ऐसिनोसा) के पत्तों से बनाए गए पकौड़े खाने के बाद एक ही परिवार के 9 लोगों की तबीयत बिगड़ गई। पकौड़े खाने के करीब आधे घंटे बाद लोगों को चक्कर आने लगे और वे असामान्य तरीके से हंसने तथा अजीब हरकतें करने लगे। हालत बिगड़ने पर सभी को बी.डी. पांडे जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार और निगरानी के बाद रविवार सुबह सभी को डिस्चार्ज कर दिया गया।

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जानकारी के अनुसार, नैनीताल के बिड़ला चुंगी मार्ग स्थित लेक व्यू क्षेत्र में रहने वाले महेश चंद्र के घर शनिवार दोपहर जन्मदिन की पार्टी थी। पार्टी में स्थानीय पत्तों से बनाए गए पकौड़े परोसे गए। परिवार और रिश्तेदारी से जुड़े कई लोगों ने इन्हें खाया। इसके करीब आधे घंटे बाद पकौड़े खाने वाले लोगों को चक्कर आने लगे और वे जोर-जोर से हंसने लगे।

इसी दौरान कुछ परिजन वहां पहुंचे तो स्थिति देखकर उन्होंने मोबाइल कैमरे में भी यह नजारा कैद किया। हालांकि, हालत सामान्य न होती देख परिजनों ने डॉक्टरों से संपर्क किया। अस्पताल से एंबुलेंस भेजी गई और सभी 9 लोगों को विभिन्न माध्यमों से नजदीकी मोटर मार्ग तक पहुंचाकर बी.डी. पांडे जिला अस्पताल लाया गया।

अस्पताल में सभी को भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। उल्टी कराने के लिए दवा देने के साथ उन्हें ग्लूकोज चढ़ाया गया। इस दौरान प्रभावित लोग अजीब-अजीब बातें और हरकतें कर रहे थे। अस्पताल स्टाफ और परिजनों को उपचार के दौरान उन्हें संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।

बताया गया कि घटना के करीब आठ घंटे बाद, रात लगभग 11 बजे, कुछ कम उम्र के और अपेक्षाकृत कम मात्रा में पकौड़े खाने वाले लोगों की स्थिति में सुधार के संकेत दिखाई देने लगे। वरिष्ठ चिकित्सकों ने सभी को रातभर निगरानी में अस्पताल में रखने की सलाह दी।

इस घटना में 90 वर्षीय महेश चंद्र, 83 वर्षीय सुरेंद्र लाल, 58 वर्षीय अनिल, 52 वर्षीय विक्रम, 46 वर्षीय कविता, 33 वर्षीय अनंता, 33 वर्षीय अक्षय और 23 वर्षीय मनीषा समेत कुल 9 लोग प्रभावित हुए।

रविवार सुबह सभी की हालत में सुधार होने के बाद चिकित्सकों ने एक-एक कर सभी को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया।

जंगल से मिलने वाली हर पत्ती खाने योग्य नहीं

यह घटना पहाड़ी क्षेत्रों में जंगली वनस्पतियों के इस्तेमाल को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती है। किसी भी जंगली पत्ती या वनस्पति की पहचान और उसकी खाद्य-सुरक्षा की पूरी जानकारी के बिना उसका सेवन करना जोखिम भरा हो सकता है।

खासकर जब किसी पौधे को पारंपरिक रूप से खाने योग्य माना जाता हो, तब भी उसकी सही वनस्पति पहचान और सुरक्षित उपयोग की जानकारी जरूरी है। इसलिए जंगल या आसपास से मिलने वाली किसी भी अनजान पत्ती को केवल स्थानीय मान्यता या परंपरा के आधार पर भोजन में इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

(नैनीताल से वरिष्ठ पत्रकार कमल जगाती की रिपोर्ट)

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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