
हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। कभी एक अधिकारी के मन में उपजा सपना आज 14 महिलाओं के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की कहानी बन रहा है। कुमाऊं मंडल में रेशम विभाग के उपनिदेशक हेम चंद्र की अभिनव सोच अब धरातल पर आकार ले रही है।
उनके प्रयासों से उत्तराखंड में पहली बार ओक तसर रेशम की स्पिनिंग का कार्य महिला स्वयं सहायता समूह के माध्यम से शुरू हुआ है। पनियाली, हल्द्वानी की ‘मां दुर्गा न्यू रेशम महिला स्वयं सहायता समूह’ की महिलाएं ओक तसर रेशम से धागा तैयार कर न केवल नई तकनीक सीख रही हैं, बल्कि अपनी आर्थिकी मजबूत करने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही हैं।
वर्ष 2019 में ऊधमसिंह नगर जिले में सहायक निदेशक के रूप में तैनाती के दौरान उपनिदेशक हेम चंद्र ने ओक तसर रेशम की स्पिनिंग को लेकर एक सपना देखा था। जुलाई 2025 में एक महिला के साथ इस पहल की शुरुआत हुई और धीरे-धीरे यह प्रयास एक समूह के रूप में आगे बढ़ा।
दिसंबर 2025 में हेम चंद्र, उपनिदेशक रेशम, कुमाऊं मंडल के मार्गदर्शन में महिलाओं को पांच दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद जनवरी 2026 में ‘मां दुर्गा न्यू रेशम महिला स्वयं सहायता समूह’ का गठन किया गया। आज इस समूह में 14 महिलाएं जुड़ी हैं।
महिलाओं ने ओक तसर रेशम की स्पिनिंग से धागा तैयार कर अब तक करीब 25 हजार रुपये की आय अर्जित की है। यह कमाई महज एक राशि नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के बढ़ते आत्मविश्वास और आर्थिक स्वावलंबन की शुरुआत है। रेशम की डोर के साथ महिलाएं अपने भविष्य को भी मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
रेशम विभाग के उपनिदेशक हेम चंद्र की यह पहल रेशम विभाग के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। उनकी अभिनव सोच पारंपरिक रेशम उत्पादन को महिलाओं की आजीविका से जोड़ते हुए विभाग को नई ऊंचाइयों की ओर ले जा रही है। खास बात यह है कि पहल का केंद्र केवल उत्पादन नहीं, बल्कि महिलाओं को कौशल, रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ना है।
ओक तसर स्पिनिंग के प्रशिक्षण में केंद्रीय रेशम बोर्ड देहरादून के वैज्ञानिक राहुल पाल और तकनीशियन सुरेश का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन से महिलाओं ने स्पिनिंग की प्रक्रिया को सीखा और अब स्वयं धागा तैयार कर रही हैं।
समूह की अध्यक्ष विमला जीना, कोषाध्यक्ष मंजू गोस्वामी और सचिव गीता गंगोला के नेतृत्व में महिलाएं इस पहल को आगे बढ़ा रही हैं। समूह से जुड़ी महिलाओं के लिए यह केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि अपने हुनर पर भरोसा करने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी बन रहा है।
एक अधिकारी का वर्षों पुराना सपना अब महिलाओं के हाथों में आकार ले रहा है। रेशम के धागे से तैयार हो रही यह कहानी बताती है कि जब अभिनव सोच, विभागीय प्रयास और महिलाओं का आत्मविश्वास एक साथ जुड़ते हैं तो छोटी-सी पहल भी बदलाव की मजबूत बुनियाद बन सकती है।










