
नैनीताल, प्रेस 15 न्यूज। ज्योलीकोट में दूषित पानी पीने को मजबूर ग्रामीणों का दर्द आखिरकार शासन की कार्रवाई तक पहुंच गया। जिस पानी से लोगों को जिंदगी और सेहत मिलनी चाहिए थी, वही पानी बीमारी की वजह बना।
पीलिया और डायरिया की चपेट में आए चार सौ से अधिक लोगों को अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ी, दो लोगों की मौत हो गई और कई परिवारों ने अपनों को बीमार होते देखा। इस गंभीर प्रकरण में दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही की पुष्टि होने के बाद शासन ने उत्तराखंड जल संस्थान और पेयजल निगम के छह अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
नैनीताल जिले के ज्योलीकोट और आसपास के क्षेत्रों में दूषित पेयजल आपूर्ति के मामले को शासन ने गंभीरता से लेते हुए उत्तराखंड जल संस्थान हल्द्वानी के प्रभारी अधीक्षण अभियंता विशाल कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उन्हें मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय, देहरादून से संबद्ध किया गया है। उनके स्थान पर नंद किशोर को अधीक्षण अभियंता का दायित्व सौंपा गया है।
इसी मामले में शासन ने घोर लापरवाही के आरोप में उत्तराखंड जल संस्थान के सहायक अभियंता नैनीताल मोहन सिंह रावत, अपर सहायक अभियंता रविंद्र, कनिष्ठ अभियंता दीपांशु शर्मा और प्रभारी सहायक अभियंता संजय कुमार आर्या को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है।
इसके अलावा पेयजल निर्माण शाखा, पेयजल निगम भीमताल के प्रभारी अधिशासी अभियंता शशिपाल सिंह को भी निलंबित किया गया है। वहीं जल संस्थान नैनीताल के अधिशासी अभियंता अनीश एम. पिल्लई को भविष्य के लिए कठोर चेतावनी जारी की गई है।
दूषित पानी से बिगड़ी लोगों की तबीयत
ज्योलीकोट और आसपास के क्षेत्रों में दूषित पेयजल के सेवन के बाद बड़ी संख्या में लोग पीलिया और डायरिया की चपेट में आए। चार सौ से अधिक लोगों के बीमार होने की बात सामने आई, जबकि दो लोगों की मौत हो गई। बीमार लोगों में कई का उपचार हल्द्वानी के बेस अस्पताल और सुशीला तिवारी अस्पताल में कराया गया। अभी भी इन अस्पतालों में पीलिया और डायरिया के कई मरीज भर्ती बताए जा रहे हैं।
बीमारी की चपेट में आने के बाद कई लोगों को निजी अस्पतालों में भी उपचार कराना पड़ा। इससे प्रभावित परिवारों पर बीमारी के साथ इलाज का आर्थिक बोझ भी पड़ा।
शासन ने मांगा था जवाब
मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया था। अधिकारियों की ओर से शासन को दिए गए जवाब को संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही की पुष्टि होने पर शासन स्तर से निलंबन की कार्रवाई की गई।
ज्योलीकोट प्रकरण में हुई यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा में लापरवाही का सीधा असर आम लोगों की जिंदगी और स्वास्थ्य पर पड़ता है। ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ दूषित पानी का मामला नहीं, बल्कि स्वच्छ पेयजल के अधिकार, स्वास्थ्य और जवाबदेही से जुड़ा सवाल बन चुका है।









