Inspiring News: शालीनता ने जीता डीएम का दिल, एक लाख मांगने गए थे, दो लाख लेकर लौटे

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लोहाघाट, प्रेस 15 न्यूज। छात्र राजनीति का मतलब केवल नारे, विरोध और तेवर नहीं होता। कभी-कभी शालीनता, संवाद और छात्रहित के लिए उठाया गया एक कदम भी ऐसी मिसाल छोड़ जाता है, जिसे दशकों बाद भी याद किया जाता है।

लोहाघाट के स्वामी विवेकानंद पीजी कॉलेज से जुड़ा करीब 33 साल पुराना एक ऐसा ही प्रसंग आज भी चर्चा में है। वर्ष 1993 में तत्कालीन छात्रसंघ अध्यक्ष भास्कर मुरारी छात्रहित के लिए तत्कालीन पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी डॉ. अनूप पांडे से मिले थे।

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उन्होंने छात्रों की जरूरतों के लिए एक लाख रुपये की सहायता मांगी। मुरारी के शालीन और मृदु व्यवहार से प्रभावित डीएम ने न केवल एक लाख रुपये की मांग पूरी की, बल्कि अपनी ओर से एक लाख रुपये और जोड़कर कुल दो लाख रुपये की मदद कर दी। अतिरिक्त एक लाख रुपये को उन्होंने मुरारी के व्यवहार के लिए पुरस्कार बताया।

उस समय चंपावत जिला पिथौरागढ़ जिले का ही हिस्सा हुआ करता था। छात्रसंघ अध्यक्ष के रूप में भास्कर मुरारी ने कॉलेज के छात्रों की जरूरतों को लेकर जिलाधिकारी के सामने अपनी बात रखी।

उनकी मांग और बातचीत के तरीके ने डॉ. अनूप पांडे को प्रभावित किया। उन्होंने छात्रहित में मांगी गई एक लाख रुपये की राशि स्वीकृत करने के साथ अपनी ओर से भी एक लाख रुपये देने का निर्णय लिया।

डॉ. पांडे ने मुरारी के शालीन व्यवहार की सराहना करते हुए अतिरिक्त राशि को उनके व्यवहार के लिए पुरस्कार बताया। यह प्रसंग इसलिए भी खास रहा कि उस दौर में छात्रसंघ अध्यक्ष के रूप में मुरारी ने अपनी बात रखने के लिए टकराव के बजाय संवाद और विनम्रता का रास्ता अपनाया।

जिलाधिकारी ने केवल आर्थिक सहयोग तक ही बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने अपने पास उपलब्ध पुस्तकें भी कॉलेज के छात्रों को देने की बात कही। साथ ही गरीब विद्यार्थियों की सूची उपलब्ध कराने को कहा, ताकि उनकी जरूरत के अनुसार उनकी मदद की जा सके। उन्होंने अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि लोहाघाट के छात्र अपनी समस्याएं लेकर आएं तो उनकी बातों को प्राथमिकता से सुना जाए।

बताया जाता है कि डॉ. अनूप पांडे ने बाद में शासन और केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। इसके बावजूद लोहाघाट के छात्रों से जुड़ा यह प्रसंग उनकी स्मृतियों में बना रहा। उनका मानना था कि स्वामी विवेकानंद के नाम पर संचालित महाविद्यालय के छात्रों के व्यवहार में भी उनके विचारों और संस्कारों की झलक दिखाई देनी चाहिए।

करीब 33 साल बाद यह प्रसंग छात्र राजनीति के बदलते दौर के बीच शालीन संवाद और सकारात्मक पहल की याद दिलाता है। छात्रहित की मांग को प्रभावी ढंग से रखने के लिए केवल तेवर ही नहीं, बल्कि व्यवहार और संवाद की भूमिका भी कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है, भास्कर मुरारी से जुड़ा यह प्रसंग इसकी मिसाल बनकर सामने आता है।

वर्तमान में भास्कर मुरारी जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। छात्रसंघ अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल का यह पुराना प्रसंग आज भी छात्रहित में शालीनता, संवाद और सकारात्मक पहल की प्रेरक कहानी के रूप में याद किया जाता है।

(लोहाघाट से वरिष्ठ पत्रकार गणेश दत्त पांडेय की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट ✍️)

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संजय पाठक

संपादक - प्रेस 15 न्यूज | अन्याय के विरुद्ध, सच के संग हूं... हां मैं एक पत्रकार हूं

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