
लोहाघाट, प्रेस 15 न्यूज। एमटेक की डिग्री हासिल कर उत्कृष्ट अभियंता बनने का सपना देखने वाली लोहाघाट की अधिवक्ता स्मृति जोशी ने परिस्थितियों और जीवन के कटु अनुभवों से सीख लेकर अपनी राह बदल दी। इंजीनियर बनने के बजाय उन्होंने कानून की पढ़ाई को अपना लक्ष्य बनाया और आज गरीब, असहाय तथा जरूरतमंद लोगों को न्याय की राह दिखाने का काम कर रही हैं।
लोहाघाट के प्रतिष्ठित परिवार में जन्मीं स्मृति जोशी को समाजसेवा और जरूरतमंदों की मदद करने की प्रेरणा अपने दादा स्वर्गीय बी. जोशी और पिता स्वर्गीय नरेश जोशी से मिली। स्वयं के साथ घटित एक घटना ने उन्हें कानून की पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया।
इसके बाद उन्होंने ठान लिया कि वह उन लोगों की मदद करेंगी, जो छोटे-छोटे विवादों के चलते वर्षों तक कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटते रहते हैं। स्मृति का मानना है कि कई ऐसे विवाद होते हैं, जिन्हें समय रहते आपसी बातचीत और समझदारी से घर की चौखट पर ही सुलझाया जा सकता है।
उन्होंने ऐसे कई मामलों में दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित कर समझौते की राह निकालने का प्रयास किया है। उनका कहना है कि वर्षों तक चलने वाले मुकदमों में लोगों का समय और पैसा दोनों बर्बाद होते हैं। यदि विवादों को शुरुआत में ही समझदारी से सुलझा लिया जाए तो यही धन परिवार के भविष्य को बेहतर बनाने में लगाया जा सकता है।
विशेष बात यह है कि जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए स्मृति जोशी कई मामलों में किसी तरह का शुल्क लेने के बजाय केवल उनका आशीर्वाद लेना पसंद करती हैं।
उनका उद्देश्य आर्थिक लाभ से अधिक लोगों को सही रास्ता दिखाना और परिवारों को टूटने से बचाना है। आपसी समझ, दूरदृष्टि और रिश्तों के महत्व को बनाए रखने की उनकी पहल को कुछ मामलों में मिली सफलता ने उनका उत्साह और बढ़ाया है। उम्र कम होने के बावजूद जब लोग उनकी बातों को महत्व देते हैं और उनके प्रयास से विवाद समाप्त होते हैं तो उन्हें भी बेहद खुशी मिलती है।
स्मृति जोशी का कहना है कि कानून का उद्देश्य केवल अदालत तक पहुंचना नहीं, बल्कि जहां संभव हो वहां समझदारी, संवाद और आपसी सहमति के माध्यम से विवादों का समाधान कर परिवारों को टूटने से बचाना भी है। उनका प्रयास है कि आने वाले समय में वह अधिक से अधिक गरीब और जरूरतमंद लोगों को न्याय की राह दिखा सकें।
(लोहाघाट से वरिष्ठ पत्रकार गणेश दत्त पांडेय की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट ✍️)









