

हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। उत्तराखंड में पिछले 25 साल से भाजपा और कांग्रेस की सरकारें काबिज रहीं लेकिन आज दिन तक पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वालों को एक अदद इलाज की सुविधा नहीं मिल सकी। नतीजा इलाज की खोज में मैदानी जिलों की दौड़… जो पलायन का दर्द दे गया।
हैरानी इस बात की भी जो भी नेता इन 25 सालों में सांसद और विधायक बने, उन्होंने भी अपने क्षेत्र में एक सुविधाओं से युक्त अस्पताल बनाने की नहीं सोची। सोचते भी कैसे क्योंकि खुद का और खुद के परिवार का इलाज नेताजी प्रदेश और देश के बाहर जो कराते हैं।
साल दर साल विधायक सांसद बनते गए और खासकर पर्वतीय इलाकों में रहने वालों के लिए एक इलाज भी बड़े सपने के पूरे होने जैसा बन गया।
प्रदेश के दुरुस्त जिले बागेश्वर पिथौरागढ़, चंपावत, नैनीताल, अल्मोड़ा जहां से देहरादून स्थित अस्पताल में जाने के लिए 17 से 18 घंटे लगते हैं। यह बात सांसद अजय भट्ट ने लोकसभा में कही।
पूर्व केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री व नैनीताल उधम सिंह नगर संसदीय क्षेत्र से सांसद अजय भट्ट ने लोकसभा सदन में उत्तराखंड में प्रधानमंत्री राहत कोष से सहायता लेने को लेकर सवाल उठाते हुए राज्य के कुमाऊं क्षेत्र के हल्द्वानी व रुद्रपुर में से कहीं भी एक अस्पताल मे प्रधानमंत्री राहत कोष की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है
सांसद अजय भट्ट ने लोकसभा सदन में शून्य काल में प्रश्न करते हुए केंद्र सरकार से मांग करते हुए बताया की उत्तराखंड में प्रदेश की जनता पूरे प्रदेश में एकमात्र अस्पताल जो की देहरादून में स्थित है से ही प्रधानमंत्री राहत कोष का लाभ ले सकती है।
उन्होंने लोकसभा में उच्च मांग उठाते हुए कहा कि प्रदेश के दुरुस्त जिले बागेश्वर पिथौरागढ़ चंपावत नैनीताल अल्मोड़ा जहां से देहरादून स्थित अस्पताल में जाने के लिए 17 से 18 घंटे लगते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि विदेशी सीमा से लगते हुए सीमांत क्षेत्र कुटटी, नाभी, रोकग , गूंजी, नपचलयु , गर्बयांग, बूँदी, कॉलिजोंग, आदि कैलाश दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रो से देहरादून आने में 17 से 18 घंटे लगते हैं, जिससे जनता को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने मांग की कि कुमाऊं के हल्द्वानी या रुद्रपुर में से कहीं भी कोई हॉस्पिटल जांच उपरांत चिन्हित कर प्रधानमंत्री राहत कोष मे अधिसूचित करने की मांग की है और उक्त सुविधा से लाभ दिया जाए जिससे क्षेत्र की जनता को सुविधा मिल सके।


