देहरादून, प्रेस 15 न्यूज। उत्तराखंड में जंगल की आग से निपटने में लापरवाह रवैये को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राज्य सरकार को जमकर फटकार लगाई और मुख्य सचिव को तलब किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड की मुख्य सचिव राधा रतूड़ी को 17 मई को कोर्ट के समक्ष पेश होकर जवाब देने का आदेश दिया कि जंगल की आग को रोकने में राज्य के ‘लापरवाह’ दृष्टिकोण के बारे में क्या किया है।
जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने जानना चाहा कि वन विभाग के अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी पर क्यों तैनात किया जा रहा है, जबकि चुनाव आयोग ने विभाग को छूट दी थी और इसे रोकने का निर्देश दिया था।
सर्वोच्च अदालत ने जंगल की आग से निपटने के लिए राज्य को केवल 3.15 करोड़ रुपए उपलब्ध कराने पर केंद्र पर भी नाराजगी जाहिर की। पीठ ने कहा कि उसे यह कहते हुए दुख हो रहा है कि जंगल की आग को नियंत्रित करने में राज्य का दृष्टिकोण उदासीन है।
चुनाव ड्यूटी पर वन अधिकारियों के बारे में जस्टिस गवई ने राज्य सरकार से कहा कि ऐसा लगता है कि आप कोई न कोई वजह ढूंढ रहे हैं। चुनाव आयोग ने पहले ही वन विभाग के कर्मचारियों को छूट दे दी है, तो आपने उन्हें चुनाव ड्यूटी के लिए क्यों लिया है?
कोर्ट ने वन विभाग में रिक्तियों को लेकर भी सवाल किए। जस्टिस गवई ने पूछा कि इतनी सारी रिक्तियां क्यों हैं?
जस्टिस मेहता ने कहा कि समाचारों से संकेत मिलता है कि पूरे देश में 300 से अधिक आग की घटनाओं में से 280 अकेले उत्तराखंड में हुई थीं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रमुख कारण चीड़ के पत्ते हैं और पूछा गया कि मौसम शुरू होने से पहले उन्हें हटाने की क्या योजना है?
अदालत ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं बढ़ेंगी और राज्य को उनसे निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए।
वहीं, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिछले सप्ताह ‘पिरूल लाओ-पैसे पाओ’ मिशन की शुरुआत की थी। बुधवार को मुख्यमंत्री ने एक्स पर कहा कि जंगलों में आग लगने का एक मुख्य कारण पिरूल है।
इसके निस्तारण के लिए हम आम लोगों के साथ मिलकर अभियान चला रहे हैं। ‘पिरूल लाओ, पैसे पाओ’ अभियान के तहत बहुत से लोग पिरूल एकत्र कर रहे हैं और इसे 50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से सरकार को बेच रहे हैं।
धामी ने कहा कि इस अभियान के कारण जंगल में आग की घटनाओं में काफी कमी आई है और वन क्षेत्र के आसपास रहने वाले ग्रामीणों को भी आय हो रही है।