
गरमपानी, प्रेस 15 न्यूज। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बदहाल स्वास्थ्य सुविधा का जब भी जिक्र आता है तो सरकार और स्वास्थ्य मंत्री निशाने पर होते हैं। लेकिन हर बार सरकार ही दोषी नहीं होती। बल्कि धरती का भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों की काहिली भी जिम्मेदार होती है।
ऐसा ही मामला नैनीताल जिले के गरमपानी से सामने आया है। जहां सीएससी में तैनात डॉक्टर और केंद्र के सीएमएस की मिलीभगत का खेल बेपर्दा हुआ है। इस पूरे खेल का खामियाजा क्षेत्र के मरीजों को भुगतने को मजबूर होना पड़ा है।

आयुक्त दीपक रावत के संज्ञान में आया कि डॉ. जगदीप सिंह, हड्डी रोग विशेषज्ञ, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र गरमपानी में नियमित रूप से उपस्थित नहीं हो रहे हैं। इतना ही नहीं डॉ. जगदीप 10 दिन में एक बार अस्पताल में आते हैं और 10 दिन की उपस्थिति, पंजिका में एक साथ हस्ताक्षर करते हैं।
यानी महीने में तीन दिन (10- 10 दिन की अंतराल) अस्पताल आओ, साइन करो और पूरे 30 दिन की हाजिरी और सैलेरी पक्की। अब यह खेल कब से चल रहा था, यह जांच का विषय है।
सोचिए पहाड़ के उन बेबस मरीजों पर क्या बीतती होगी जो सस्ते इलाज की आस में यहां से बैरंग लौटते होंगे और जिंदगी बचाने को हल्द्वानी और कहीं और आने को मजबूर होते होंगे।
आयुक्त कुमाऊं ने मामले को गंभीरता पूर्व लेते हुए उप जिलाधिकारी कैंची धाम से प्रकरण की जांच करायी गयी। उप जिलाधिकारी कैंचीधाम ने कुमाऊं आयुक्त को बताया कि डॉ. जगदीप के द्वारा रजिस्टर में हस्ताक्षर किये गये हैं, लेकिन 01 हफ्ते से वह अस्पताल में नहीं आ रहे हैं।
मामले में जब आयुक्त ने अस्पताल में लगे सीसीटीवी की फुटेज का परीक्षण किये जाने पर डॉ. जगदीप सीसीटीवी में कहीं नहीं दिखे।
हैरानी की बात यह है कि इस सम्बन्ध में सीएमओ नैनीताल से पूछे जाने पर मुख्य चिकित्साधिकारी, नैनीताल को इसकी कोई जानकारी नहीं थी। इतना ही नहीं प्रकरण की सूचना सीएमएस डॉ. सतीश सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र गरमपानी द्वारा सीएमओ नैनीताल को नहीं दी गई। साफ है सीएमएस और डॉक्टर की मिलीभगत से मरीजों को दरकिनार कर पूरा अटेंडेंस खेल खेला जा रहा था।
बुधवार को जब जांच की सुगबुगाहट हुई तो सीएमएस ने सीएमओ नैनीताल को पूरे मामले की जानकारी दी।
मुख्य चिकित्साधिकारी नैनीताल को प्रकरण की जानकारी न होने व डॉ. जगदीप सिंह की अनुपस्थिति के संबंध में तथा सीएमएस के द्वारा उच्चाधिकारियों को इसकी सूचना न दिये जाने के संबंध में आयुक्त दीपक रावत द्वारा निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य कुमाऊं मण्डल, नैनीताल को प्रकरण की जांच करने के लिए निर्देशित किया गया है। जांच में दोषी पाये जाने पर दोषियों के विरूद्ध अनुशासनिक कार्यवाही किये जाने के निर्देश दिए गये हैं।
