

हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।शरण्ये त्रयंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते… 30 मार्च 2025 दिन रविवार को नवरात्रि एवं हिंदू नूतन वर्ष का आगमन हो रहा है।
नवरात्रि के नौ रातों और 10 दिनों में देवी मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना का विधान है।
नव संवत्सर का नाम ‘सिद्धार्थी’ नाम संवत्सर होगा, जिसमें राजा सूर्य देव और मंत्री भी सूर्य देव ही होंगे।
नवरात्रि के मध्य क्रमशः 30 मार्च , 1 अप्रैल, 2,4, 6,तथा 7 अप्रैल को सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण होगा। इसके अतिरिक्त 30 मार्च 2025 को इंद्र योग बनने से सभी कार्य सिद्ध एवं शुभ फल प्रदान करेंगे, साथ ही मीन राशि में छ: ग्रहों की युति से षष्ठ ग्रही योग बनेगा।
माता के आगमन की सवारी
देवी शक्ति का वाहन शेर होता है परंतु देवी जब भी पृथ्वी लोक पर विचरण करती हैं तो अलग वाहन पर सवार होकर आती है जोकि सप्ताह के दिनों पर निर्भर करता है।
नवरात्र का प्रारंभ रविवार को होने से देवी दुर्गा हाथी पर सवार होकर पृथ्वी लोक में विचरण करेंगी। हाथी पर सवार होकर आने का अर्थ सर्वसिद्धिदायक होता है शुभ फलों की प्राप्ति होगी वर्षा पर्याप्त मात्रा में होगी। भौतिक सुख सुविधाओं में वृद्धि होगी, सभी मनोरथ पूर्ण होंगे, ज्ञान और समृद्धि में वृद्धि होगी, धन-धान्य की प्राप्ति होगी।
पूजा का शुभ मुहूर्त
30 मार्च 2025 को कलश स्थापना का समय प्रातः सूर्योदय से मध्याह्न 12:50 तक है। अभिजीत मुहूर्त 12:01 से 12:50 तक।
नवरात्रि तिथियां इस प्रकार रहेंगी
30 मार्च 2025 प्रथम नवरात्रि।
31 मार्च 2025 द्वितीय नवरात्रि।
तृतीय नवरात्रि तिथि क्षय।
1 अप्रैल 2025 चतुर्थ नवरात्रि।
2 अप्रैल 2025 लक्ष्मी जयंती, पंचम नवरात्रि।
3 अप्रैल 2025 छठी नवरात्रि।
4 अप्रैल 2025 सप्तम नवरात्रि।
5 अप्रैल 2025 दुर्गा अष्टमी।
6 अप्रैल 2025 श्री रामनवमी।
पूजा विधि
ब्रह्म मुहूर्त में जागें नित्य कर्म से निवृत्त होकर स्नानादि करने के उपरांत संपूर्ण घर और पूजा स्थल को स्वच्छ करने के बाद घर में गंगाजल व गोमूत्र से छिड़काव करें व पूजा स्थल पर आसन ग्रहण करें। माता रानी को गंगाजल से स्नान करा लाल वस्त्र और सोलह सिंगार समर्पित करें। स्वच्छ स्थान से मिट्टी लेकर, मिट्टी को चौड़े मुंह वाले बर्तन में रखें और उसमें सप्तधान्य बोएं।
अब उसके ऊपर कलश में जल भरें और उसके ऊपरी भाग (गर्दन) में कलावा बांधें। आम के नौ पत्तों को कलश के ऊपर रखें। नारियल में कलावा लपेटे। उसके बाद नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर और पत्तों के मध्य रखें। घटस्थापना पूरी होने के पश्चात् मां दुर्गा का आह्वान करें ।
घी का दीपक जलाएं कुमकुम, अक्षत, धूप, दीप नैवेद्य, फल अर्पित करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। घी के दीपक से मां दुर्गा की आरती करें। मां शैलपुत्री को गाय के दूध से बने हुए पकवानों का भोग लगाया जाता है। इसके अतिरिक्त मीठा पान अवश्य चढ़ाएं और गुड़ का भोग भी आप लगा सकते हैं।
सायं काल अपने घर के मुख्य द्वार पर नौ दीपक अवश्य जलाएं, सभी कष्टों का नाश होगा।
नोट: यह लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए प्रेस 15 न्यूज उत्तरदायी नहीं है।


