हल्द्वानी, प्रेस 15 न्यूज। सोचिए क्या गजब विडंबना है लोकतंत्र वाले हमारे प्यारे देश भारत की। यहां जनता के नाम पर जब कोई जनप्रतिनिधि बनना चाहता है तो उसे पहले भारी भरकम खर्च करना होता है। अगर पैसा नहीं तो नेता बनने के ख्वाब भी देखना गुनाह जैसा ही है। सोचिए एक सच्चा व्यक्ति जिसके मन में शहर का विकास करने का इरादा हो, वह कैसे दिनों दिन खर्चीला चुनाव लड़ सकता है।
अब साल भर से टलते आ रहे निकाय चुनाव होने के प्रबल आसार बन गए हैं। क्योंकि राज्य निर्वाचन आयोग भी अब सक्रिय हो गया है। इस बार राज्य निर्वाचन आयोग ने निकाय चुनाव से पहले प्रत्याशियों के चुनाव खर्च की सीमा में बढ़ोतरी कर दी है। यानी साफ है चुनाव आयोग को भी लग रहा है कि अब महंगाई बढ़ गई है। ऐसे में नेताजी की नैया पार लगानी है तो उन्हें खर्चने के मौका देना होगा।
अब सोचिए जब एक जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के लिए पैसा बहाएगा तो चुनाव जीतने का बाद उसका पहला और अंतिम ध्येय भी यही होगा कि कैसे लुटाया पैसा वापस लाया जाए। ऐसे में आप शहर का विकास तो भूल ही जाइए। हालाकि चुनाव आयोग ने हर बार की तरह इस बार भी प्रत्याशियों के खर्च का निरीक्षण और उनके लेखा जोखे की निगरानी करेगा।
लेकिन हर कोई जानता है कि चुनाव आयोग की ये निगरानी जमीन पर कितना उतरती है। सच यही है कि चुनावी खर्च की सीमा तो महज एक झुनझुना है, इस सीमा को लांघकर चुनाव जीतने की मंशा पाले गली मोहल्लों में खड़े हैं।
हल्द्वानी में भी मेयर और पार्षद बनने का सपना पालने वालों की कमी नहीं है। ऐसे में यहां भी सत्ताधारी दल से जुड़े प्रत्याशी तो फिलहाल जीत सुनिश्चित समझे बैठे हैं क्योंकि हाल फिलहाल केदारनाथ उपचुनाव जो फतह किया है। वहीं, विपक्षी पार्टी में प्रत्याशियों की लंबी फौज है। लेकिन जैसे ही आरक्षण की स्थिति साफ होगी तो हर तरफ से प्रत्याशी जीत के इरादे से मैदान में होंगे।
राज्य निर्वाचन आयोग ने निगम के मेयर के लिए खर्च सीमा 16 लाख से बढ़ाकर 30 लाख, पालिकाध्यक्ष की छह से बढ़ाकर आठ लाख, नगर पंचायत अध्यक्ष की दो से बढ़ाकर तीन लाख ₹ तक कर दी है। आयोग ने जमानत राशि और नामांकन पत्र मूल्य में कोई बदलाव नहीं किया है।
राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार ने अधिकतम निर्वाचन व्यय और उसकी लेखा परीक्षक आदेश 2024 जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि प्रत्याशियों के चुनावी खर्च की कड़ी निगरानी की जाएगी।
प्रशासन की ओर से प्रत्याशियों के खर्च का निरीक्षण और उनके लेखा-जोखा का परीक्षण किया जाएगा। व्यय प्रेक्षक चुनाव के दौरान दौरा करेंगे। प्रत्याशियों को खर्च का पूरा ब्यौरा उपलब्ध कराना होगा।
प्रत्याशियों को चुनावी खर्च के ब्यौरे में नामांकन पत्र का मूल्य, जमानत राशि, मतदाता सूची खरीद का खर्च, निर्वाचन घोषणा पत्र का खर्च, पोस्टर, हैंड बिल छपवाने, चिपकवाने का खर्च, निर्वाचन कार्यालय का किराया, विज्ञापन छपवाने पर खर्च, प्रचार सभाओं पर खर्च, सभाओं के लिए पंडाल, साउंड, फोटोग्राफर, वीडियो आदि पर खर्च, सेलिब्रिटी खर्च, झंडे बैनर, एजेंट का पूरा खर्च हिसाब देना होगा।
नगर निगमों में चुनाव की खर्च सीमा
पद पुरानी नई सीमा
मेयर 40 वार्ड तक 16 लाख 20 लाख
मेयर 60 वार्ड तक 16 लाख 25 लाख
मेयर 61 से अधिक वार्ड 16 लाख 30 लाख
डिप्टी मेयर दो लाख दो लाख
सभासद दो लाख तीन लाख
नगर पालिका परिषद में चुनाव खर्च सीमा
पद पुरानी नई सीमा
अध्यक्ष 10 वार्ड तक चार लाख छह लाख
अध्यक्ष 10 से अधिक छह लाख आठ लाख
सदस्य 60 हजार 80 हजार
नगर पंचायतों में चुनाव खर्च सीमा
पद पुरानी नई सीमा
अध्यक्ष दो लाख तीन लाख
सदस्य 30 हजार 50 हजार