
नई दिल्ली, प्रेस 15 न्यूज। देश में कहने को एक लोकतंत्र है लेकिन यहां न्याय सबके लिए अलग अलग होता है। ताजा मामला देश की राजधानी दिल्ली में शोभायमान जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़ा है।
कुछ दिन पहले जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर आग लगी। जब फायर बिग्रेड की टीम मौके पर पहुंची तो इस दौरान उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं। सामने नोटों का जखीरा मिला। अब जज साहब के घर इतना बड़ा नोटों का ढेर कैसे आया, यह सब जानते हैं लेकिन फिलहाल इस खबर ने देश में हड़कंप मचा दिया है।
दरअसल, कुछ दिन पहले जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में लगी आग के दौरान पुलिस को भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी। जिस समय ये नकदी बरामद हुई उस दौरान जस्टिस यशवंत वर्मा शहर में नहीं थे।
जस्टिस के आवास से भारी मात्रा में नकदी मिलने की सूचना बाद में CJI संजीव खन्ना की अगुवाई में सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम को मिली। कॉलेजियम ने जस्टिस यशवंत वर्मा को फिर से इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर करने का फैसला किया।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा का फिर से इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजने की सिफारिश करने फैसला किया है।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के इस फैसले से हड़कंप मच गया और ये पूछा जाने लगा कि आखिर ये सिफारिश करने का फैसला क्यों लेना पड़ा।
इधर, इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिशन इस फैसले से नाराज है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने साफ कहा है कि क्या इलाहाबाद हाइकोर्ट कूड़ेदान है जो आरोपों से जुड़े जज को यहां भेजा जा रहा है। हम इस फैसले का विरोध करेंगे।


